शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1967

1967 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
18 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
22 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
23 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी
28 जनवरीशनिवारमघातृतीया
30 जनवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
5 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
20 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
24 फ़रवरीशुक्रवारमघापूर्णिमा
26 फ़रवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
27 फ़रवरीसोमवारहस्ततृतीया

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चबुधवारस्वातीपंचमी
3 मार्चशुक्रवारअनुराधाअष्टमी
5 मार्चरविवारमूलदशमी
12 मार्चरविवारउत्तर भाद्रपदाप्रतिपदा
13 मार्चसोमवाररेवतीद्वितीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
15 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
20 अप्रैलगुरुवारमघादशमी
22 अप्रैलशनिवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
30 अप्रैलरविवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

10 मुहूर्त
6 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
7 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
11 मईगुरुवाररोहिणीद्वितीया
12 मईशुक्रवारमृगशिरातृतीया
19 मईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
20 मईशनिवारहस्तएकादशी
22 मईसोमवारस्वातीत्रयोदशी
24 मईबुधवारअनुराधाप्रतिपदा
26 मईशुक्रवारमूलतृतीया
28 मईरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

जून

9 मुहूर्त
2 जूनशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
3 जूनशनिवाररेवतीएकादशी
9 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
14 जूनबुधवारमघाषष्ठी
17 जूनशनिवारहस्तदशमी
22 जूनगुरुवारमूलपूर्णिमा
24 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
29 जूनगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
30 जूनशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
5 जुलाईबुधवाररोहिणीत्रयोदशी
13 जुलाईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
14 जुलाईशुक्रवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
13 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
18 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
19 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
20 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
25 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
27 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
3 दिसंबररविवारमूलद्वितीया
11 दिसंबरसोमवाररेवतीदशमी
16 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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