शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1969

1969 की 40 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीगुरुवारमूलत्रयोदशी
23 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
24 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
29 जनवरीबुधवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
7 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
9 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
13 फ़रवरीगुरुवारमूलएकादशी
19 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
24 फ़रवरीसोमवाररोहिणीअष्टमी
26 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी

मार्च

4 मुहूर्त
5 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
6 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया
10 मार्चसोमवारअनुराधासप्तमी
14 मार्चशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

3 मुहूर्त
21 अप्रैलसोमवारमृगशिरापंचमी
27 अप्रैलरविवारमघादशमी
30 अप्रैलबुधवारहस्तत्रयोदशी

मई

9 मुहूर्त
2 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
4 मईरविवारअनुराधातृतीया
7 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
12 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
18 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
19 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
24 मईशनिवारमघाअष्टमी
29 मईगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
31 मईशनिवारअनुराधापूर्णिमा

जून

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जुलाई

6 मुहूर्त
6 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
7 जुलाईसोमवाररेवतीअष्टमी
11 जुलाईशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
12 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
20 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
21 जुलाईसोमवारहस्तषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
20 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
21 नवंबरशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
26 नवंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

5 मुहूर्त
1 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
4 दिसंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
5 दिसंबरशुक्रवारहस्तएकादशी
7 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
10 दिसंबरबुधवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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