जनवरी
6 मुहूर्त| 17 जनवरी | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | षष्ठी |
| 18 जनवरी | सोमवार | हस्त | षष्ठी |
| 20 जनवरी | बुधवार | स्वाती | अष्टमी |
| 22 जनवरी | शुक्रवार | अनुराधा | दशमी |
| 24 जनवरी | रविवार | मूल | द्वादशी |
| 31 जनवरी | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | पंचमी |
फ़रवरी
8 मुहूर्त| 1 फ़रवरी | सोमवार | रेवती | षष्ठी |
| 5 फ़रवरी | शुक्रवार | रोहिणी | एकादशी |
| 6 फ़रवरी | शनिवार | मृगशिरा | एकादशी |
| 11 फ़रवरी | गुरुवार | मघा | प्रतिपदा |
| 13 फ़रवरी | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | तृतीया |
| 17 फ़रवरी | बुधवार | स्वाती | सप्तमी |
| 21 फ़रवरी | रविवार | मूल | एकादशी |
| 27 फ़रवरी | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वितीया |
मार्च
3 मुहूर्त| 4 मार्च | गुरुवार | रोहिणी | अष्टमी |
| 13 मार्च | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | प्रतिपदा |
| 14 मार्च | रविवार | हस्त | द्वितीया |
अप्रैल
4 मुहूर्त| 16 अप्रैल | शुक्रवार | मूल | पंचमी |
| 18 अप्रैल | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 23 अप्रैल | शुक्रवार | उत्तर भाद्रपदा | त्रयोदशी |
| 29 अप्रैल | गुरुवार | मृगशिरा | पंचमी |
मई
8 मुहूर्त| 6 मई | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 7 मई | शुक्रवार | हस्त | द्वादशी |
| 10 मई | सोमवार | स्वाती | पूर्णिमा |
| 12 मई | बुधवार | अनुराधा | द्वितीया |
| 16 मई | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | षष्ठी |
| 21 मई | शुक्रवार | रेवती | एकादशी |
| 26 मई | बुधवार | मृगशिरा | द्वितीया |
| 31 मई | सोमवार | मघा | सप्तमी |
जून
8 मुहूर्त| 3 जून | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | दशमी |
| 4 जून | शुक्रवार | हस्त | एकादशी |
| 6 जून | रविवार | स्वाती | त्रयोदशी |
| 10 जून | गुरुवार | मूल | प्रतिपदा |
| 18 जून | शुक्रवार | रेवती | दशमी |
| 21 जून | सोमवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
| 28 जून | सोमवार | मघा | पंचमी |
| 30 जून | बुधवार | उत्तर फाल्गुनी | सप्तमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।