शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1974

1974 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
14 जनवरीसोमवारहस्तसप्तमी
18 जनवरीशुक्रवारअनुराधाएकादशी
21 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी
28 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
2 फ़रवरीशनिवाररोहिणीदशमी
3 फ़रवरीरविवारमृगशिराएकादशी
8 फ़रवरीशुक्रवारमघाद्वितीया
11 फ़रवरीसोमवारहस्तपंचमी
13 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
17 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
25 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
9 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
10 मार्चरविवारहस्तद्वितीया
14 मार्चगुरुवारअनुराधाषष्ठी

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
20 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
25 अप्रैलगुरुवाररोहिणीतृतीया

मई

11 मुहूर्त
1 मईबुधवारमघादशमी
3 मईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
4 मईशनिवारहस्तत्रयोदशी
6 मईसोमवारस्वातीपूर्णिमा
8 मईबुधवारअनुराधाद्वितीया
12 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
18 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
19 मईरविवाररेवतीद्वादशी
23 मईगुरुवाररोहिणीद्वितीया
30 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
31 मईशुक्रवारहस्तएकादशी

जून

8 मुहूर्त
2 जूनरविवारस्वातीत्रयोदशी
6 जूनगुरुवारमूलप्रतिपदा
8 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
15 जूनशनिवाररेवतीदशमी
24 जूनसोमवारमघापंचमी
26 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
27 जूनगुरुवारहस्तअष्टमी
29 जूनशनिवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

1 मुहूर्त
30 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबररविवारमृगशिराद्वितीया
5 दिसंबरगुरुवारमघाषष्ठी
8 दिसंबररविवारहस्तदशमी
14 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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