शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1977

1977 की 38 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीरविवारअनुराधाद्वादशी
24 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
26 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
30 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
31 जनवरीसोमवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
5 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
10 फ़रवरीगुरुवारस्वातीसप्तमी
14 फ़रवरीसोमवारमूलएकादशी
16 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
21 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
26 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

3 मुहूर्त
5 मार्चशनिवारमघापूर्णिमा
7 मार्चसोमवारहस्तद्वितीया
11 मार्चशुक्रवारअनुराधाषष्ठी

अप्रैल

3 मुहूर्त
16 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
23 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
30 अप्रैलशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी

मई

11 मुहूर्त
1 मईरविवारहस्तत्रयोदशी
5 मईगुरुवारअनुराधाद्वितीया
7 मईशनिवारमूलपंचमी
9 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
14 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
15 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
19 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
20 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
26 मईगुरुवारमघाअष्टमी
28 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
29 मईरविवारहस्तएकादशी

जून

6 मुहूर्त
3 जूनशुक्रवारमूलद्वितीया
11 जूनशनिवाररेवतीदशमी
17 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
22 जूनबुधवारमघापंचमी
24 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
25 जूनशनिवारहस्तअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
26 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
27 नवंबररविवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

2 मुहूर्त
3 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
8 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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