शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1979

1979 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
19 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
20 जनवरीशनिवारहस्तसप्तमी
24 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
26 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
2 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
7 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
15 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
18 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
22 फ़रवरीगुरुवारमूलदशमी
24 फ़रवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
28 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
5 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी
14 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा

अप्रैल

3 मुहूर्त
18 अप्रैलबुधवारमूलषष्ठी
20 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
29 अप्रैलरविवाररोहिणीतृतीया

मई

7 मुहूर्त
6 मईरविवारमघादशमी
9 मईबुधवारहस्तद्वादशी
13 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
17 मईगुरुवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
23 मईबुधवाररेवतीद्वादशी
27 मईरविवारमृगशिराप्रतिपदा
28 मईसोमवारमृगशिराद्वितीया

जून

5 मुहूर्त
2 जूनशनिवारमघासप्तमी
7 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
11 जूनसोमवारमूलप्रतिपदा
13 जूनबुधवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
29 जूनशुक्रवारमघापंचमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
2 जुलाईसोमवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
5 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
2 नवंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
15 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
16 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
22 नवंबरगुरुवारमूलतृतीया
24 नवंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
29 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदादशमी
30 नवंबरशुक्रवाररेवतीएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
5 दिसंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
10 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
12 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
15 दिसंबरशनिवारस्वातीएकादशी
16 दिसंबररविवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष