शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1982

1982 की 40 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
16 जनवरीशनिवारहस्तसप्तमी
20 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
22 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
30 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
31 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
4 फ़रवरीगुरुवारमृगशिराएकादशी
11 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
14 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
19 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
21 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
26 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

4 मुहूर्त
3 मार्चबुधवाररोहिणीअष्टमी
10 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
11 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया
14 मार्चरविवारस्वातीपंचमी

अप्रैल

4 मुहूर्त
14 अप्रैलबुधवारमूलषष्ठी
17 अप्रैलशनिवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
22 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
26 अप्रैलसोमवाररोहिणीतृतीया

मई

9 मुहूर्त
2 मईरविवारमघादशमी
5 मईबुधवारहस्तत्रयोदशी
7 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
9 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
14 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
19 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
20 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
24 मईसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
29 मईशनिवारमघासप्तमी

जून

6 मुहूर्त
3 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
4 जूनशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
6 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा
17 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
26 जूनशनिवारमघाषष्ठी
28 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

दिसंबर

5 मुहूर्त
1 दिसंबरबुधवाररोहिणीप्रतिपदा
2 दिसंबरगुरुवारमृगशिराद्वितीया
8 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
10 दिसंबरशुक्रवारहस्तदशमी
12 दिसंबररविवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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