शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1983

1983 की 41 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
15 जनवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
20 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
21 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
26 जनवरीबुधवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चबुधवारहस्ततृतीया
3 मार्चगुरुवारस्वातीपंचमी
6 मार्चरविवारअनुराधाअष्टमी
10 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

5 मुहूर्त
18 अप्रैलसोमवारमृगशिरापंचमी
24 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
25 अप्रैलसोमवारहस्तत्रयोदशी
27 अप्रैलबुधवारस्वातीपूर्णिमा
29 अप्रैलशुक्रवारअनुराधाद्वितीया

मई

10 मुहूर्त
2 मईसोमवारमूलपंचमी
4 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
9 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
14 मईशनिवाररोहिणीद्वितीया
15 मईरविवारमृगशिरातृतीया
20 मईशुक्रवारमघाअष्टमी
22 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
23 मईसोमवारहस्तद्वादशी
27 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
29 मईरविवारमूलतृतीया

जून

6 मुहूर्त
6 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
16 जूनगुरुवारमघाषष्ठी
18 जूनशनिवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
23 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
25 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
27 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

6 मुहूर्त
3 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
4 जुलाईसोमवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
13 जुलाईबुधवारमघातृतीया
15 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
16 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

4 मुहूर्त
17 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
21 नवंबरसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
27 नवंबररविवारमघाअष्टमी
30 नवंबरबुधवारहस्तएकादशी

दिसंबर

2 मुहूर्त
2 दिसंबरशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
15 दिसंबरगुरुवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष