जनवरी
4 मुहूर्त| 15 जनवरी | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | प्रतिपदा |
| 20 जनवरी | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | षष्ठी |
| 21 जनवरी | शुक्रवार | रेवती | सप्तमी |
| 26 जनवरी | बुधवार | मृगशिरा | द्वादशी |
फ़रवरी
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
मार्च
4 मुहूर्त| 2 मार्च | बुधवार | हस्त | तृतीया |
| 3 मार्च | गुरुवार | स्वाती | पंचमी |
| 6 मार्च | रविवार | अनुराधा | अष्टमी |
| 10 मार्च | गुरुवार | उत्तर आषाढ़ा | एकादशी |
अप्रैल
5 मुहूर्त| 18 अप्रैल | सोमवार | मृगशिरा | पंचमी |
| 24 अप्रैल | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | द्वादशी |
| 25 अप्रैल | सोमवार | हस्त | त्रयोदशी |
| 27 अप्रैल | बुधवार | स्वाती | पूर्णिमा |
| 29 अप्रैल | शुक्रवार | अनुराधा | द्वितीया |
मई
10 मुहूर्त| 2 मई | सोमवार | मूल | पंचमी |
| 4 मई | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 9 मई | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
| 14 मई | शनिवार | रोहिणी | द्वितीया |
| 15 मई | रविवार | मृगशिरा | तृतीया |
| 20 मई | शुक्रवार | मघा | अष्टमी |
| 22 मई | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 23 मई | सोमवार | हस्त | द्वादशी |
| 27 मई | शुक्रवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 29 मई | रविवार | मूल | तृतीया |
जून
6 मुहूर्त| 6 जून | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
| 16 जून | गुरुवार | मघा | षष्ठी |
| 18 जून | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | अष्टमी |
| 23 जून | गुरुवार | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 25 जून | शनिवार | मूल | पूर्णिमा |
| 27 जून | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वितीया |
जुलाई
6 मुहूर्त| 3 जुलाई | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | अष्टमी |
| 4 जुलाई | सोमवार | रेवती | अष्टमी |
| 8 जुलाई | शुक्रवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
| 13 जुलाई | बुधवार | मघा | तृतीया |
| 15 जुलाई | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | षष्ठी |
| 16 जुलाई | शनिवार | हस्त | सप्तमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।