शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1986

1986 की 53 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
16 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
17 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
22 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
23 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
30 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
31 जनवरीशुक्रवारहस्तषष्ठी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
2 फ़रवरीरविवारस्वातीअष्टमी
7 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
13 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
19 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
24 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
26 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
27 फ़रवरीगुरुवारहस्ततृतीया

मार्च

6 मुहूर्त
1 मार्चशनिवारस्वातीपंचमी
3 मार्चसोमवारअनुराधासप्तमी
5 मार्चबुधवारमूलदशमी
7 मार्चशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
12 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
13 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया

अप्रैल

5 मुहूर्त
14 अप्रैलसोमवाररोहिणीपंचमी
20 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
25 अप्रैलशुक्रवारस्वातीप्रतिपदा
28 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
30 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

8 मुहूर्त
5 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
11 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
12 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
17 मईशनिवारमघाअष्टमी
19 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
22 मईगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
24 मईशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
26 मईसोमवारमूलतृतीया

जून

8 मुहूर्त
2 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
8 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
14 जूनशनिवारमघाषष्ठी
16 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
19 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
20 जूनशुक्रवारअनुराधात्रयोदशी
22 जूनरविवारमूलपूर्णिमा
29 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

4 मुहूर्त
4 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
5 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
13 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
14 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
13 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
14 नवंबरशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
19 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
24 नवंबरसोमवारमघासप्तमी
27 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
28 नवंबरशुक्रवारहस्तएकादशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
3 दिसंबरबुधवारमूलद्वितीया
10 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
11 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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