शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1988

1988 की 41 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीशुक्रवारअनुराधाएकादशी
17 जनवरीरविवारमूलत्रयोदशी
24 जनवरीरविवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
25 जनवरीसोमवाररेवतीसप्तमी
29 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
30 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
4 फ़रवरीगुरुवारमघाद्वितीया
6 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
8 फ़रवरीसोमवारहस्तपंचमी
10 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
14 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
20 फ़रवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

5 मुहूर्त
3 मार्चगुरुवारमघापूर्णिमा
5 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
6 मार्चरविवारहस्ततृतीया
10 मार्चगुरुवारअनुराधासप्तमी
14 मार्चसोमवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

3 मुहूर्त
21 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी
28 अप्रैलगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
29 अप्रैलशुक्रवारहस्तत्रयोदशी

मई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जून

7 मुहूर्त
2 जूनगुरुवारमूलद्वितीया
9 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
20 जूनसोमवारमघाषष्ठी
22 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
25 जूनशनिवारस्वातीदशमी
27 जूनसोमवारअनुराधाद्वादशी
29 जूनबुधवारमूलपूर्णिमा

जुलाई

6 मुहूर्त
1 जुलाईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
6 जुलाईबुधवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
11 जुलाईसोमवाररोहिणीत्रयोदशी
17 जुलाईरविवारमघातृतीया
20 जुलाईबुधवारहस्तषष्ठी
21 जुलाईगुरुवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
24 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
25 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
30 नवंबरबुधवारमघासप्तमी

दिसंबर

5 मुहूर्त
1 दिसंबरगुरुवारमघाअष्टमी
3 दिसंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 दिसंबररविवारहस्तदशमी
10 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा
12 दिसंबरसोमवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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