शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1991

1991 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
21 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
26 जनवरीशनिवाररोहिणीएकादशी
27 जनवरीरविवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवारमघाद्वितीया
3 फ़रवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
4 फ़रवरीसोमवारहस्तषष्ठी
6 फ़रवरीबुधवारस्वातीअष्टमी
10 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
22 फ़रवरीशुक्रवाररोहिणीअष्टमी
28 फ़रवरीगुरुवारमघापूर्णिमा

मार्च

3 मुहूर्त
2 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
3 मार्चरविवारहस्ततृतीया
7 मार्चगुरुवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

1 मुहूर्त
29 अप्रैलसोमवारस्वातीप्रतिपदा

मई

12 मुहूर्त
1 मईबुधवारअनुराधातृतीया
5 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
6 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
11 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
12 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
15 मईबुधवाररोहिणीप्रतिपदा
16 मईगुरुवारमृगशिरातृतीया
23 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
26 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी
30 मईगुरुवारमूलद्वितीया
31 मईशुक्रवारमूलतृतीया

जून

9 मुहूर्त
2 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
8 जूनशनिवाररेवतीदशमी
13 जूनगुरुवारमृगशिराप्रतिपदा
17 जूनसोमवारमघाषष्ठी
19 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
22 जूनशनिवारस्वातीएकादशी
24 जूनसोमवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनगुरुवारमूलपूर्णिमा
29 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

4 मुहूर्त
4 जुलाईगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
5 जुलाईशुक्रवाररेवतीअष्टमी
10 जुलाईबुधवारमृगशिरात्रयोदशी
17 जुलाईबुधवारहस्तषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
23 नवंबरशनिवाररोहिणीद्वितीया
24 नवंबररविवारमृगशिरातृतीया
28 नवंबरगुरुवारमघासप्तमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबररविवारहस्तएकादशी
7 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा
8 दिसंबररविवारमूलद्वितीया
16 दिसंबरसोमवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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