शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1987

1987 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
18 जनवरीरविवारमघातृतीया
21 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
23 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
25 जनवरीरविवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
8 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
9 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
14 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
16 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
19 फ़रवरीगुरुवारस्वातीषष्ठी
21 फ़रवरीशनिवारअनुराधाअष्टमी
23 फ़रवरीसोमवारमूलदशमी
25 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी

मार्च

3 मुहूर्त
2 मार्चसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
7 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
8 मार्चरविवारमृगशिराअष्टमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
19 अप्रैलरविवारमूलषष्ठी
26 अप्रैलरविवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

11 मुहूर्त
1 मईशुक्रवाररोहिणीतृतीया
9 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
10 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
11 मईसोमवारहस्तत्रयोदशी
14 मईगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
16 मईशनिवारमूलतृतीया
18 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
23 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
24 मईरविवाररेवतीद्वादशी
28 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
29 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

जून

5 मुहूर्त
4 जूनगुरुवारमघासप्तमी
7 जूनरविवारहस्तदशमी
14 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
20 जूनशनिवाररेवतीदशमी
24 जूनबुधवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

4 मुहूर्त
1 जुलाईबुधवारमघापंचमी
3 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
4 जुलाईशनिवारहस्तअष्टमी
6 जुलाईसोमवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
8 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
14 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
18 नवंबरबुधवारहस्तद्वादशी
22 नवंबररविवारअनुराधाप्रतिपदा
25 नवंबरबुधवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
30 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
5 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
6 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
12 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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