जनवरी
4 मुहूर्त| 18 जनवरी | रविवार | मघा | तृतीया |
| 21 जनवरी | बुधवार | हस्त | षष्ठी |
| 23 जनवरी | शुक्रवार | स्वाती | अष्टमी |
| 25 जनवरी | रविवार | अनुराधा | दशमी |
फ़रवरी
8 मुहूर्त| 8 फ़रवरी | रविवार | रोहिणी | दशमी |
| 9 फ़रवरी | सोमवार | मृगशिरा | एकादशी |
| 14 फ़रवरी | शनिवार | मघा | प्रतिपदा |
| 16 फ़रवरी | सोमवार | उत्तर फाल्गुनी | तृतीया |
| 19 फ़रवरी | गुरुवार | स्वाती | षष्ठी |
| 21 फ़रवरी | शनिवार | अनुराधा | अष्टमी |
| 23 फ़रवरी | सोमवार | मूल | दशमी |
| 25 फ़रवरी | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वादशी |
अप्रैल
3 मुहूर्त| 15 अप्रैल | बुधवार | स्वाती | प्रतिपदा |
| 19 अप्रैल | रविवार | मूल | षष्ठी |
| 26 अप्रैल | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | त्रयोदशी |
मई
11 मुहूर्त| 1 मई | शुक्रवार | रोहिणी | तृतीया |
| 9 मई | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 10 मई | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | द्वादशी |
| 11 मई | सोमवार | हस्त | त्रयोदशी |
| 14 मई | गुरुवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 16 मई | शनिवार | मूल | तृतीया |
| 18 मई | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | षष्ठी |
| 23 मई | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | एकादशी |
| 24 मई | रविवार | रेवती | द्वादशी |
| 28 मई | गुरुवार | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 29 मई | शुक्रवार | मृगशिरा | द्वितीया |
जून
5 मुहूर्त| 4 जून | गुरुवार | मघा | सप्तमी |
| 7 जून | रविवार | हस्त | दशमी |
| 14 जून | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | तृतीया |
| 20 जून | शनिवार | रेवती | दशमी |
| 24 जून | बुधवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
जुलाई
4 मुहूर्त| 1 जुलाई | बुधवार | मघा | पंचमी |
| 3 जुलाई | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | सप्तमी |
| 4 जुलाई | शनिवार | हस्त | अष्टमी |
| 6 जुलाई | सोमवार | स्वाती | दशमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।