शुभ मुहूर्त
विवाह मुहूर्त 1900
1900 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।
जनवरी
6 मुहूर्त| 19 जनवरी | शुक्रवार | मघा | तृतीया |
| 21 जनवरी | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | पंचमी |
| 22 जनवरी | सोमवार | हस्त | षष्ठी |
| 24 जनवरी | बुधवार | स्वाती | अष्टमी |
| 26 जनवरी | शुक्रवार | अनुराधा | दशमी |
| 28 जनवरी | रविवार | मूल | द्वादशी |
फ़रवरी
6 मुहूर्त| 4 फ़रवरी | रविवार | रेवती | पंचमी |
| 9 फ़रवरी | शुक्रवार | मृगशिरा | दशमी |
| 15 फ़रवरी | गुरुवार | मघा | प्रतिपदा |
| 17 फ़रवरी | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | तृतीया |
| 23 फ़रवरी | शुक्रवार | अनुराधा | अष्टमी |
| 25 फ़रवरी | रविवार | मूल | दशमी |
अप्रैल
6 मुहूर्त| 14 अप्रैल | शनिवार | हस्त | पूर्णिमा |
| 16 अप्रैल | सोमवार | स्वाती | प्रतिपदा |
| 18 अप्रैल | बुधवार | अनुराधा | तृतीया |
| 20 अप्रैल | शुक्रवार | मूल | पंचमी |
| 22 अप्रैल | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 27 अप्रैल | शुक्रवार | उत्तर भाद्रपदा | त्रयोदशी |
मई
7 मुहूर्त| 10 मई | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 11 मई | शुक्रवार | हस्त | द्वादशी |
| 17 मई | गुरुवार | मूल | तृतीया |
| 19 मई | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | पंचमी |
| 24 मई | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
| 25 मई | शुक्रवार | रेवती | एकादशी |
| 30 मई | बुधवार | मृगशिरा | द्वितीया |
जून
6 मुहूर्त| 4 जून | सोमवार | मघा | सप्तमी |
| 7 जून | गुरुवार | हस्त | दशमी |
| 10 जून | रविवार | स्वाती | द्वादशी |
| 14 जून | गुरुवार | मूल | प्रतिपदा |
| 20 जून | बुधवार | उत्तर भाद्रपदा | अष्टमी |
| 25 जून | सोमवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।