शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1901

1901 की 40 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
18 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
25 जनवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
26 जनवरीशनिवाररेवतीसप्तमी
30 जनवरीबुधवाररोहिणीएकादशी
31 जनवरीगुरुवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
8 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
10 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
15 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
17 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
21 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
6 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
7 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया
10 मार्चरविवारस्वातीपंचमी

अप्रैल

2 मुहूर्त
17 अप्रैलबुधवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
28 अप्रैलरविवारमघादशमी

मई

11 मुहूर्त
1 मईबुधवारहस्तत्रयोदशी
3 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
5 मईरविवारअनुराधाद्वितीया
10 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
15 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
19 मईरविवाररोहिणीप्रतिपदा
20 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
25 मईशनिवारमघाअष्टमी
27 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
30 मईगुरुवारस्वातीद्वादशी
31 मईशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

जून

5 मुहूर्त
2 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा
12 जूनबुधवाररेवतीदशमी
21 जूनशुक्रवारमघापंचमी
23 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
24 जूनसोमवारहस्तअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
23 नवंबरशनिवाररेवतीद्वादशी
27 नवंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

6 मुहूर्त
2 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
5 दिसंबरगुरुवारहस्तदशमी
7 दिसंबरशनिवारस्वातीद्वादशी
8 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
12 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
14 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष