जनवरी
5 मुहूर्त| 16 जनवरी | शुक्रवार | मघा | तृतीया |
| 18 जनवरी | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | षष्ठी |
| 19 जनवरी | सोमवार | हस्त | सप्तमी |
| 23 जनवरी | शुक्रवार | अनुराधा | दशमी |
| 25 जनवरी | रविवार | मूल | द्वादशी |
फ़रवरी
6 मुहूर्त| 2 फ़रवरी | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | पंचमी |
| 7 फ़रवरी | शनिवार | रोहिणी | दशमी |
| 8 फ़रवरी | रविवार | मृगशिरा | एकादशी |
| 14 फ़रवरी | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | तृतीया |
| 19 फ़रवरी | गुरुवार | अनुराधा | अष्टमी |
| 22 फ़रवरी | रविवार | मूल | एकादशी |
मार्च
5 मुहूर्त| 1 मार्च | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वितीया |
| 2 मार्च | सोमवार | रेवती | तृतीया |
| 6 मार्च | शुक्रवार | रोहिणी | सप्तमी |
| 7 मार्च | शनिवार | मृगशिरा | अष्टमी |
| 14 मार्च | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | प्रतिपदा |
अप्रैल
5 मुहूर्त| 15 अप्रैल | बुधवार | अनुराधा | तृतीया |
| 17 अप्रैल | शुक्रवार | मूल | पंचमी |
| 20 अप्रैल | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | अष्टमी |
| 25 अप्रैल | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | त्रयोदशी |
| 30 अप्रैल | गुरुवार | रोहिणी | तृतीया |
मई
9 मुहूर्त| 7 मई | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 8 मई | शुक्रवार | हस्त | द्वादशी |
| 11 मई | सोमवार | स्वाती | पूर्णिमा |
| 13 मई | बुधवार | अनुराधा | द्वितीया |
| 17 मई | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | षष्ठी |
| 22 मई | शुक्रवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
| 23 मई | शनिवार | रेवती | एकादशी |
| 27 मई | बुधवार | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 28 मई | गुरुवार | मृगशिरा | द्वितीया |
जून
6 मुहूर्त| 5 जून | शुक्रवार | हस्त | एकादशी |
| 7 जून | रविवार | स्वाती | द्वादशी |
| 11 जून | गुरुवार | मूल | प्रतिपदा |
| 13 जून | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | तृतीया |
| 20 जून | शनिवार | रेवती | दशमी |
| 29 जून | सोमवार | मघा | पंचमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।