शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1902

1902 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीगुरुवाररेवतीसप्तमी
20 जनवरीसोमवाररोहिणीएकादशी
26 जनवरीरविवारमघातृतीया
29 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
31 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
5 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
13 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
17 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
22 फ़रवरीशनिवारमघापूर्णिमा
24 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
27 फ़रवरीगुरुवारस्वातीपंचमी
28 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी

मार्च

3 मुहूर्त
2 मार्चरविवारअनुराधाअष्टमी
6 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
12 मार्चबुधवाररेवतीतृतीया

अप्रैल

6 मुहूर्त
18 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
20 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
23 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
25 अप्रैलशुक्रवारअनुराधातृतीया
28 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
30 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

7 मुहूर्त
5 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 मईशनिवारमृगशिरातृतीया
15 मईगुरुवारमघाअष्टमी
17 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
18 मईरविवारहस्तएकादशी
23 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
25 मईरविवारमूलतृतीया

जून

8 मुहूर्त
1 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी
2 जूनसोमवाररेवतीएकादशी
7 जूनशनिवारमृगशिराप्रतिपदा
11 जूनबुधवारमघाषष्ठी
13 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
21 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
23 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
29 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
3 जुलाईगुरुवाररोहिणीद्वादशी
11 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
12 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
13 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
17 नवंबरसोमवाररोहिणीद्वितीया
22 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
24 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
27 नवंबरगुरुवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

3 मुहूर्त
10 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
11 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
15 दिसंबरसोमवारमृगशिरापूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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