शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1905

1905 की 53 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
18 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
19 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
23 जनवरीसोमवारमघाद्वितीया
25 जनवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
26 जनवरीगुरुवारहस्तषष्ठी
28 जनवरीशनिवारस्वातीअष्टमी
30 जनवरीसोमवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
9 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
10 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
15 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
20 फ़रवरीसोमवारमघाप्रतिपदा
22 फ़रवरीबुधवारहस्ततृतीया
24 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीपंचमी
26 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
8 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
9 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
13 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी

अप्रैल

6 मुहूर्त
16 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
17 अप्रैलसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
20 अप्रैलगुरुवारस्वातीप्रतिपदा
22 अप्रैलशनिवारअनुराधातृतीया
24 अप्रैलसोमवारमूलषष्ठी
26 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी

मई

7 मुहूर्त
1 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
7 मईरविवाररोहिणीतृतीया
15 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
19 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
21 मईरविवारमूलतृतीया
28 मईरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी
29 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

जून

9 मुहूर्त
4 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
9 जूनशुक्रवारमघाषष्ठी
11 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
12 जूनसोमवारहस्तदशमी
14 जूनबुधवारस्वातीद्वादशी
18 जूनरविवारमूलप्रतिपदा
19 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
25 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
30 जूनशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

2 मुहूर्त
8 जुलाईशनिवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
9 जुलाईरविवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
8 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
9 नवंबरगुरुवाररेवतीत्रयोदशी
15 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
20 नवंबरसोमवारमघाअष्टमी
22 नवंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 नवंबरगुरुवारहस्तएकादशी
27 नवंबरसोमवारअनुराधाप्रतिपदा

दिसंबर

3 मुहूर्त
6 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
7 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
11 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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