शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1906

1906 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीबुधवारहस्तसप्तमी
18 जनवरीगुरुवारस्वातीअष्टमी
20 जनवरीशनिवारअनुराधादशमी
22 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी
29 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
4 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
5 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
10 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
12 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
15 फ़रवरीगुरुवारस्वातीसप्तमी
18 फ़रवरीरविवारमूलदशमी
26 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
3 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
11 मार्चरविवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
12 मार्चसोमवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

3 मुहूर्त
14 अप्रैलशनिवारमूलषष्ठी
16 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
21 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

11 मुहूर्त
5 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
6 मईरविवारहस्तद्वादशी
10 मईगुरुवारअनुराधाद्वितीया
11 मईशुक्रवारमूलतृतीया
13 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
18 मईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
19 मईशनिवाररेवतीद्वादशी
20 मईरविवाररेवतीद्वादशी
24 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
25 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
31 मईगुरुवारमघाअष्टमी

जून

7 मुहूर्त
2 जूनशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 जूनसोमवारस्वातीद्वादशी
8 जूनशुक्रवारमूलद्वितीया
16 जूनशनिवाररेवतीदशमी
27 जूनबुधवारमघापंचमी
29 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
30 जूनशनिवारहस्तअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
29 अक्टूबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी

नवंबर

4 मुहूर्त
4 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
12 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
17 नवंबरशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
26 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
1 दिसंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
2 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
8 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
13 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
14 दिसंबरशुक्रवारअनुराधात्रयोदशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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