शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1909

1909 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
14 जनवरीगुरुवारहस्तसप्तमी
18 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
20 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी
22 जनवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
27 जनवरीबुधवाररेवतीषष्ठी
31 जनवरीरविवाररोहिणीदशमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
1 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
6 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
10 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
12 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
14 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी
18 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
27 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

3 मुहूर्त
6 मार्चशनिवारमघापूर्णिमा
8 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
13 मार्चशनिवारअनुराधाषष्ठी

अप्रैल

4 मुहूर्त
14 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
18 अप्रैलरविवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
24 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
29 अप्रैलगुरुवारमघादशमी

मई

12 मुहूर्त
1 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
2 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
3 मईसोमवारहस्तत्रयोदशी
5 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा
7 मईशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
16 मईरविवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
17 मईसोमवाररेवतीत्रयोदशी
20 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
21 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
27 मईगुरुवारमघाअष्टमी
29 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
30 मईरविवारहस्तएकादशी

जून

7 मुहूर्त
5 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा
13 जूनरविवाररेवतीदशमी
18 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
23 जूनबुधवारमघापंचमी
25 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
26 जूनशनिवारहस्तअष्टमी
28 जूनसोमवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
24 नवंबरबुधवाररेवतीद्वादशी
28 नवंबररविवाररोहिणीप्रतिपदा
29 नवंबरसोमवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
4 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
9 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
13 दिसंबरसोमवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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