शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1911

1911 की 49 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
19 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
20 जनवरीशुक्रवारहस्तषष्ठी
25 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
27 जनवरीशुक्रवारमूलद्वादशी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
4 फ़रवरीशनिवाररेवतीपंचमी
8 फ़रवरीबुधवाररोहिणीदशमी
9 फ़रवरीगुरुवारमृगशिराएकादशी
16 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
19 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
23 फ़रवरीगुरुवारमूलदशमी
24 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
26 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी

मार्च

3 मुहूर्त
3 मार्चशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
8 मार्चबुधवारमृगशिराअष्टमी
13 मार्चसोमवारमघात्रयोदशी

अप्रैल

4 मुहूर्त
15 अप्रैलशनिवारस्वातीद्वितीया
19 अप्रैलबुधवारमूलपंचमी
21 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
27 अप्रैलगुरुवाररेवतीत्रयोदशी

मई

8 मुहूर्त
1 मईसोमवाररोहिणीतृतीया
7 मईरविवारमघादशमी
10 मईबुधवारहस्तद्वादशी
14 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
19 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
24 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
25 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
29 मईसोमवारमृगशिराप्रतिपदा

जून

4 मुहूर्त
3 जूनशनिवारमघासप्तमी
8 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
11 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा
15 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

4 मुहूर्त
2 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
3 जुलाईसोमवारहस्तअष्टमी
5 जुलाईबुधवारस्वातीदशमी
6 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

8 मुहूर्त
4 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
8 नवंबरबुधवाररोहिणीद्वितीया
9 नवंबरगुरुवारमृगशिरातृतीया
16 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
17 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
23 नवंबरगुरुवारमूलद्वितीया
24 नवंबरशुक्रवारमूलतृतीया
26 नवंबररविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

दिसंबर

6 मुहूर्त
1 दिसंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
2 दिसंबरशनिवाररेवतीएकादशी
6 दिसंबरबुधवाररोहिणीपूर्णिमा
7 दिसंबरगुरुवारमृगशिराद्वितीया
11 दिसंबरसोमवारमघाषष्ठी
13 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष