शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1914

1914 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जनवरीरविवारहस्तसप्तमी
21 जनवरीबुधवारअनुराधादशमी
23 जनवरीशुक्रवारमूलद्वादशी
31 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

10 मुहूर्त
1 फ़रवरीरविवाररेवतीषष्ठी
5 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
6 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी
11 फ़रवरीबुधवारमघाप्रतिपदा
13 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
16 फ़रवरीसोमवारस्वातीसप्तमी
20 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
22 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
27 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
28 फ़रवरीशनिवाररेवतीतृतीया

मार्च

2 मुहूर्त
5 मार्चगुरुवाररोहिणीअष्टमी
13 मार्चशुक्रवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलबुधवारमूलषष्ठी
17 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
23 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

7 मुहूर्त
6 मईबुधवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
7 मईगुरुवारहस्तद्वादशी
11 मईसोमवारअनुराधाद्वितीया
15 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
20 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
21 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
27 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया

जून

5 मुहूर्त
1 जूनसोमवारमघासप्तमी
3 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 जूनगुरुवारहस्तएकादशी
18 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
28 जूनरविवारमघापंचमी

जुलाई

1 मुहूर्त
1 जुलाईबुधवारहस्तअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
31 अक्टूबरशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

नवंबर

9 मुहूर्त
5 नवंबरगुरुवाररोहिणीद्वितीया
6 नवंबरशुक्रवाररोहिणीतृतीया
14 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
15 नवंबररविवारहस्तद्वादशी
18 नवंबरबुधवारअनुराधाप्रतिपदा
20 नवंबरशुक्रवारमूलतृतीया
22 नवंबररविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
27 नवंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
28 नवंबरशनिवाररेवतीएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
3 दिसंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
4 दिसंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
9 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
12 दिसंबरशनिवारहस्तदशमी
14 दिसंबरसोमवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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