शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1917

1917 की 40 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
14 जनवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
15 जनवरीसोमवारहस्तसप्तमी
19 जनवरीशुक्रवारअनुराधाएकादशी
21 जनवरीरविवारमूलत्रयोदशी
27 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
28 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
2 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिराएकादशी
3 फ़रवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
8 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
10 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
14 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
19 फ़रवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
24 फ़रवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवाररोहिणीअष्टमी
10 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
11 मार्चरविवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

2 मुहूर्त
15 अप्रैलरविवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
26 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी

मई

8 मुहूर्त
3 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
4 मईशुक्रवारहस्तद्वादशी
12 मईशनिवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
17 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
18 मईशुक्रवाररेवतीद्वादशी
23 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया
28 मईसोमवारमघासप्तमी
31 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी

जून

8 मुहूर्त
1 जूनशुक्रवारहस्तएकादशी
3 जूनरविवारस्वातीत्रयोदशी
7 जूनगुरुवारमूलद्वितीया
14 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
25 जूनसोमवारमघाषष्ठी
27 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
28 जूनगुरुवारहस्तअष्टमी
30 जूनशनिवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
29 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
30 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
5 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
9 दिसंबररविवारहस्तदशमी
15 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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