शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1919

1919 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
19 जनवरीरविवारमघातृतीया
22 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
24 जनवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
27 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
29 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
5 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
10 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
15 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
17 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
21 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी
23 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी
27 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी

मार्च

2 मुहूर्त
5 मार्चबुधवाररेवतीतृतीया
9 मार्चरविवारमृगशिराअष्टमी

अप्रैल

4 मुहूर्त
16 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
21 अप्रैलसोमवारमूलषष्ठी
23 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
28 अप्रैलसोमवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

10 मुहूर्त
2 मईशुक्रवाररोहिणीतृतीया
10 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
11 मईरविवारहस्तद्वादशी
14 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा
16 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
18 मईरविवारमूलतृतीया
25 मईरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी
26 मईसोमवाररेवतीएकादशी
30 मईशुक्रवाररोहिणीप्रतिपदा
31 मईशनिवारमृगशिराद्वितीया

जून

6 मुहूर्त
4 जूनबुधवारमघाषष्ठी
6 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
8 जूनरविवारहस्तदशमी
14 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा
16 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
26 जूनगुरुवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

4 मुहूर्त
2 जुलाईबुधवारमघापंचमी
4 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
5 जुलाईशनिवारहस्तअष्टमी
7 जुलाईसोमवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
5 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
6 नवंबरगुरुवाररेवतीत्रयोदशी
10 नवंबरसोमवाररोहिणीतृतीया
15 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
17 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 नवंबररविवारअनुराधाप्रतिपदा

दिसंबर

4 मुहूर्त
3 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
7 दिसंबररविवाररोहिणीपूर्णिमा
8 दिसंबरसोमवारमृगशिराप्रतिपदा
13 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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