शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1915

1915 की 46 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
16 जनवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
21 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
22 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
27 जनवरीबुधवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
4 फ़रवरीगुरुवारहस्तपंचमी
6 फ़रवरीशनिवारस्वातीसप्तमी
10 फ़रवरीबुधवारमूलएकादशी
12 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
17 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
24 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चसोमवारमघापूर्णिमा
3 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
4 मार्चगुरुवारहस्ततृतीया
6 मार्चशनिवारस्वातीपंचमी
11 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

मई

10 मुहूर्त
1 मईशनिवारअनुराधाद्वितीया
5 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
10 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
16 मईरविवाररोहिणीद्वितीया
17 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
22 मईशनिवारमघाअष्टमी
24 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
27 मईगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
29 मईशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
30 मईरविवारमूलद्वितीया

जून

8 मुहूर्त
7 जूनसोमवाररेवतीदशमी
13 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
18 जूनशुक्रवारमघापंचमी
20 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
21 जूनसोमवारहस्तअष्टमी
23 जूनबुधवारस्वातीएकादशी
25 जूनशुक्रवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनरविवारमूलपूर्णिमा

जुलाई

6 मुहूर्त
4 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
9 जुलाईशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
10 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
18 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
19 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
22 जुलाईगुरुवारअनुराधादशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

3 मुहूर्त
18 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
24 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
29 नवंबरसोमवारमघासप्तमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरगुरुवारहस्तदशमी
4 दिसंबरशनिवारस्वातीद्वादशी
8 दिसंबरबुधवारमूलद्वितीया
15 दिसंबरबुधवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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