शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1904

1904 की 44 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
18 जनवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
23 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
24 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी
28 जनवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
29 जनवरीशुक्रवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
3 फ़रवरीबुधवारमघाद्वितीया
7 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
10 फ़रवरीबुधवारअनुराधादशमी
12 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
14 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
19 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
21 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
26 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी

मार्च

4 मुहूर्त
3 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
4 मार्चशुक्रवारहस्ततृतीया
6 मार्चरविवारस्वातीपंचमी
12 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

4 मुहूर्त
20 अप्रैलबुधवारमृगशिरापंचमी
25 अप्रैलसोमवारमघादशमी
27 अप्रैलबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
28 अप्रैलगुरुवारहस्तत्रयोदशी

मई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जून

9 मुहूर्त
8 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
9 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
19 जूनरविवारमघाषष्ठी
20 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
23 जूनगुरुवारस्वातीएकादशी
25 जूनशनिवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनसोमवारमूलपूर्णिमा
29 जूनबुधवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
30 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

4 मुहूर्त
6 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
10 जुलाईरविवाररोहिणीद्वादशी
11 जुलाईसोमवारमृगशिरात्रयोदशी
18 जुलाईसोमवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
19 नवंबरशनिवाररेवतीद्वादशी
20 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
24 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
25 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
30 नवंबरबुधवारमघाअष्टमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 दिसंबररविवारस्वातीद्वादशी
8 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
10 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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