शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2031

2031 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

3 मुहूर्त
15 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी
19 जनवरीरविवारअनुराधाएकादशी
27 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
2 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
3 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
8 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
9 फ़रवरीरविवारमघाद्वितीया
12 फ़रवरीबुधवारहस्तपंचमी
14 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
17 फ़रवरीसोमवारमूलदशमी
19 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
24 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
10 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
15 मार्चशनिवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

1 मुहूर्त
26 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी

मई

11 मुहूर्त
2 मईशुक्रवारमघादशमी
4 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
5 मईसोमवारहस्तत्रयोदशी
7 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा
8 मईगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
12 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
17 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
18 मईरविवाररेवतीद्वादशी
22 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
23 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
29 मईगुरुवारमघाअष्टमी

जून

10 मुहूर्त
1 जूनरविवारहस्तदशमी
5 जूनगुरुवारअनुराधापूर्णिमा
7 जूनशनिवारमूलद्वितीया
8 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
14 जूनशनिवाररेवतीदशमी
20 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
25 जूनबुधवारमघापंचमी
27 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
28 जूनशनिवारहस्तअष्टमी
30 जूनसोमवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
29 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
30 नवंबररविवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
6 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
11 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
15 दिसंबरसोमवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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