जनवरी
6 मुहूर्त| 16 जनवरी | बुधवार | रोहिणी | द्वादशी |
| 17 जनवरी | गुरुवार | मृगशिरा | त्रयोदशी |
| 24 जनवरी | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | पंचमी |
| 25 जनवरी | शुक्रवार | हस्त | षष्ठी |
| 27 जनवरी | रविवार | स्वाती | अष्टमी |
| 31 जनवरी | गुरुवार | मूल | त्रयोदशी |
फ़रवरी
8 मुहूर्त| 7 फ़रवरी | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | पंचमी |
| 8 फ़रवरी | शुक्रवार | रेवती | षष्ठी |
| 13 फ़रवरी | बुधवार | मृगशिरा | दशमी |
| 18 फ़रवरी | सोमवार | मघा | पूर्णिमा |
| 20 फ़रवरी | बुधवार | उत्तर फाल्गुनी | द्वितीया |
| 23 फ़रवरी | शनिवार | स्वाती | षष्ठी |
| 25 फ़रवरी | सोमवार | अनुराधा | अष्टमी |
| 27 फ़रवरी | बुधवार | मूल | दशमी |
मार्च
4 मुहूर्त| 1 मार्च | शुक्रवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वादशी |
| 6 मार्च | बुधवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वितीया |
| 7 मार्च | गुरुवार | रेवती | तृतीया |
| 11 मार्च | सोमवार | रोहिणी | सप्तमी |
अप्रैल
4 मुहूर्त| 19 अप्रैल | शुक्रवार | स्वाती | द्वितीया |
| 22 अप्रैल | सोमवार | मूल | पंचमी |
| 24 अप्रैल | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 29 अप्रैल | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
मई
5 मुहूर्त| 5 मई | रविवार | रोहिणी | तृतीया |
| 18 मई | शनिवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 20 मई | सोमवार | मूल | तृतीया |
| 22 मई | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | षष्ठी |
| 27 मई | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | एकादशी |
जून
7 मुहूर्त| 2 जून | रविवार | मृगशिरा | प्रतिपदा |
| 8 जून | शनिवार | मघा | सप्तमी |
| 13 जून | गुरुवार | स्वाती | द्वादशी |
| 14 जून | शुक्रवार | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 16 जून | रविवार | मूल | प्रतिपदा |
| 23 जून | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | अष्टमी |
| 28 जून | शुक्रवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।