जनवरी
6 मुहूर्त| 15 जनवरी | शुक्रवार | रेवती | सप्तमी |
| 20 जनवरी | बुधवार | मृगशिरा | त्रयोदशी |
| 24 जनवरी | रविवार | मघा | द्वितीया |
| 27 जनवरी | बुधवार | हस्त | षष्ठी |
| 29 जनवरी | शुक्रवार | स्वाती | अष्टमी |
| 31 जनवरी | रविवार | अनुराधा | दशमी |
फ़रवरी
5 मुहूर्त| 3 फ़रवरी | बुधवार | मूल | द्वादशी |
| 11 फ़रवरी | गुरुवार | रेवती | पंचमी |
| 21 फ़रवरी | रविवार | मघा | प्रतिपदा |
| 26 फ़रवरी | शुक्रवार | स्वाती | षष्ठी |
| 28 फ़रवरी | रविवार | अनुराधा | अष्टमी |
मार्च
4 मुहूर्त| 4 मार्च | गुरुवार | उत्तर आषाढ़ा | एकादशी |
| 10 मार्च | बुधवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वितीया |
| 11 मार्च | गुरुवार | रेवती | तृतीया |
| 15 मार्च | सोमवार | रोहिणी | सप्तमी |
अप्रैल
5 मुहूर्त| 17 अप्रैल | शनिवार | मघा | एकादशी |
| 19 अप्रैल | सोमवार | हस्त | त्रयोदशी |
| 21 अप्रैल | बुधवार | स्वाती | प्रतिपदा |
| 26 अप्रैल | सोमवार | मूल | पंचमी |
| 28 अप्रैल | बुधवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
मई
8 मुहूर्त| 3 मई | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
| 8 मई | शनिवार | रोहिणी | द्वितीया |
| 9 मई | रविवार | मृगशिरा | तृतीया |
| 16 मई | रविवार | उत्तर फाल्गुनी | एकादशी |
| 17 मई | सोमवार | हस्त | द्वादशी |
| 21 मई | शुक्रवार | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 23 मई | रविवार | मूल | तृतीया |
| 31 मई | सोमवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
जून
6 मुहूर्त| 5 जून | शनिवार | रोहिणी | प्रतिपदा |
| 10 जून | गुरुवार | मघा | षष्ठी |
| 13 जून | रविवार | हस्त | दशमी |
| 19 जून | शनिवार | मूल | पूर्णिमा |
| 21 जून | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | द्वितीया |
| 27 जून | रविवार | उत्तर भाद्रपदा | अष्टमी |
जुलाई
3 मुहूर्त| 2 जुलाई | शुक्रवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
| 9 जुलाई | शुक्रवार | उत्तर फाल्गुनी | षष्ठी |
| 10 जुलाई | शनिवार | हस्त | सप्तमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।