शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2026

2026 की 41 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
19 जनवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
24 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
25 जनवरीरविवाररेवतीसप्तमी
29 जनवरीगुरुवाररोहिणीएकादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
6 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
8 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
13 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
15 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
20 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
26 फ़रवरीगुरुवारमृगशिरादशमी

मार्च

4 मुहूर्त
5 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
6 मार्चशुक्रवारहस्ततृतीया
8 मार्चरविवारस्वातीपंचमी
14 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ादशमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
20 अप्रैलसोमवाररोहिणीतृतीया
26 अप्रैलरविवारमघादशमी
29 अप्रैलबुधवारहस्तत्रयोदशी

मई

1 मुहूर्त
1 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा

जून

7 मुहूर्त
10 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
11 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
20 जूनशनिवारमघाषष्ठी
22 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
25 जूनगुरुवारस्वातीएकादशी
27 जूनशनिवारअनुराधात्रयोदशी
29 जूनसोमवारमूलपूर्णिमा

जुलाई

8 मुहूर्त
2 जुलाईगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
8 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
12 जुलाईरविवाररोहिणीत्रयोदशी
17 जुलाईशुक्रवारमघातृतीया
19 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
20 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
22 जुलाईबुधवारस्वातीअष्टमी
24 जुलाईशुक्रवारअनुराधादशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
25 नवंबरबुधवाररोहिणीप्रतिपदा
26 नवंबरगुरुवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

5 मुहूर्त
3 दिसंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 दिसंबरशुक्रवारहस्तएकादशी
6 दिसंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
10 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
12 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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