शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2024

2024 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
17 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
21 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
22 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी
28 जनवरीरविवारमघातृतीया
31 जनवरीबुधवारहस्तपंचमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
2 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीसप्तमी
5 फ़रवरीसोमवारअनुराधादशमी
8 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
14 फ़रवरीबुधवाररेवतीपंचमी
19 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
24 फ़रवरीशनिवारमघापूर्णिमा
26 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया

मार्च

4 मुहूर्त
1 मार्चशुक्रवारस्वातीपंचमी
3 मार्चरविवारअनुराधासप्तमी
7 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
11 मार्चसोमवारउत्तर भाद्रपदाप्रतिपदा

अप्रैल

4 मुहूर्त
19 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
21 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
24 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
26 अप्रैलशुक्रवारअनुराधाद्वितीया

मई

8 मुहूर्त
5 मईरविवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
6 मईसोमवाररेवतीत्रयोदशी
10 मईशुक्रवाररोहिणीतृतीया
16 मईगुरुवारमघाअष्टमी
18 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
19 मईरविवारहस्तएकादशी
24 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
26 मईरविवारमूलतृतीया

जून

8 मुहूर्त
2 जूनरविवाररेवतीदशमी
7 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
12 जूनबुधवारमघाषष्ठी
16 जूनरविवारहस्तदशमी
20 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
22 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
24 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
29 जूनशनिवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

4 मुहूर्त
3 जुलाईबुधवाररोहिणीद्वादशी
4 जुलाईगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
12 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
13 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
13 नवंबरबुधवाररेवतीद्वादशी
17 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
18 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
23 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
25 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
29 नवंबरशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

2 मुहूर्त
11 दिसंबरबुधवाररेवतीएकादशी
15 दिसंबररविवारमृगशिरापूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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