शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2062

2062 की 52 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
18 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
22 जनवरीरविवारमृगशिराद्वादशी
27 जनवरीशुक्रवारमघातृतीया
29 जनवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
30 जनवरीसोमवारहस्तषष्ठी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
1 फ़रवरीबुधवारस्वातीअष्टमी
3 फ़रवरीशुक्रवारअनुराधादशमी
5 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
19 फ़रवरीरविवारमृगशिरादशमी
23 फ़रवरीगुरुवारमघापूर्णिमा
25 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
26 फ़रवरीरविवारहस्ततृतीया

मार्च

5 मुहूर्त
2 मार्चगुरुवारअनुराधासप्तमी
3 मार्चशुक्रवारअनुराधाअष्टमी
5 मार्चरविवारमूलदशमी
12 मार्चरविवारउत्तर भाद्रपदाप्रतिपदा
13 मार्चसोमवाररेवतीद्वितीया

अप्रैल

5 मुहूर्त
19 अप्रैलबुधवारमघाएकादशी
21 अप्रैलशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
24 अप्रैलसोमवारस्वातीप्रतिपदा
26 अप्रैलबुधवारअनुराधातृतीया
28 अप्रैलशुक्रवारमूलपंचमी

मई

10 मुहूर्त
1 मईसोमवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
6 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
7 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
11 मईगुरुवाररोहिणीतृतीया
18 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
19 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
21 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी
24 मईबुधवारअनुराधाप्रतिपदा
26 मईशुक्रवारमूलतृतीया
28 मईरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

जून

7 मुहूर्त
3 जूनशनिवाररेवतीएकादशी
8 जूनगुरुवारमृगशिराप्रतिपदा
14 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
18 जूनरविवारस्वातीद्वादशी
22 जूनगुरुवारमूलप्रतिपदा
24 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
30 जूनशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
5 जुलाईबुधवारमृगशिरात्रयोदशी
12 जुलाईबुधवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
13 जुलाईगुरुवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
13 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
18 नवंबरशनिवाररोहिणीद्वितीया
19 नवंबररविवारमृगशिरातृतीया
24 नवंबरशुक्रवारमघाअष्टमी
25 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
26 नवंबररविवारहस्तएकादशी

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबरशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
3 दिसंबररविवारमूलद्वितीया
11 दिसंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
16 दिसंबरशनिवारमृगशिरापूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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