शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2064

2064 की 43 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवारमूलत्रयोदशी
19 जनवरीशनिवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
24 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
25 जनवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
30 जनवरीबुधवारमृगशिराएकादशी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
4 फ़रवरीसोमवारमघाद्वितीया
7 फ़रवरीगुरुवारहस्तपंचमी
9 फ़रवरीशनिवारस्वातीसप्तमी
11 फ़रवरीसोमवारअनुराधादशमी
13 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
15 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
20 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
22 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीपंचमी
27 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी

मार्च

4 मुहूर्त
5 मार्चबुधवारहस्तद्वितीया
7 मार्चशुक्रवारस्वातीपंचमी
9 मार्चरविवारअनुराधासप्तमी
13 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

2 मुहूर्त
26 अप्रैलशनिवारमघादशमी
28 अप्रैलसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी

मई

1 मुहूर्त
1 मईगुरुवारस्वातीपूर्णिमा

जून

9 मुहूर्त
1 जूनरविवारमूलद्वितीया
9 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदादशमी
15 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
20 जूनशुक्रवारमघाषष्ठी
22 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
25 जूनबुधवारस्वातीएकादशी
26 जूनगुरुवारअनुराधाद्वादशी
28 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
30 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

7 मुहूर्त
6 जुलाईरविवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
7 जुलाईसोमवाररेवतीअष्टमी
11 जुलाईशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
12 जुलाईशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
17 जुलाईगुरुवारमघातृतीया
19 जुलाईशनिवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
20 जुलाईरविवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
20 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
26 नवंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
3 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 दिसंबरगुरुवारहस्तएकादशी
6 दिसंबरशनिवारस्वातीत्रयोदशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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