शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2066

2066 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
17 जनवरीरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जनवरीसोमवारहस्तसप्तमी
22 जनवरीशुक्रवारअनुराधाएकादशी
23 जनवरीशनिवारमूलद्वादशी
30 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
31 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
4 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
5 फ़रवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
6 फ़रवरीशनिवारमृगशिराएकादशी
11 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
13 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
20 फ़रवरीशनिवारमूलएकादशी
22 फ़रवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
26 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
27 फ़रवरीशनिवाररेवतीतृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
4 मार्चगुरुवाररोहिणीअष्टमी
12 मार्चशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
13 मार्चशनिवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
15 अप्रैलगुरुवारमूलषष्ठी
17 अप्रैलशनिवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
22 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
29 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी

मई

7 मुहूर्त
6 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
7 मईशुक्रवारहस्तद्वादशी
9 मईरविवारस्वातीपूर्णिमा
14 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
19 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
20 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
26 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया

जून

6 मुहूर्त
3 जूनगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 जूनशुक्रवारहस्तएकादशी
9 जूनबुधवारमूलद्वितीया
17 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
28 जूनसोमवारमघापंचमी
30 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

जुलाई

1 मुहूर्त
1 जुलाईगुरुवारहस्तअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

2 मुहूर्त
30 अक्टूबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
31 अक्टूबररविवाररेवतीत्रयोदशी

नवंबर

8 मुहूर्त
5 नवंबरशुक्रवाररोहिणीतृतीया
13 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
14 नवंबररविवारहस्तद्वादशी
18 नवंबरगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
20 नवंबरशनिवारमूलतृतीया
22 नवंबरसोमवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
27 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
28 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
3 दिसंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
9 दिसंबरगुरुवारमघासप्तमी
12 दिसंबररविवारहस्तदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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