शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2069

2069 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवारस्वातीअष्टमी
19 जनवरीशनिवारअनुराधाएकादशी
21 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी
27 जनवरीरविवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
28 जनवरीसोमवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवाररोहिणीदशमी
2 फ़रवरीशनिवारमृगशिराएकादशी
7 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
9 फ़रवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
11 फ़रवरीसोमवारहस्तपंचमी
13 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
17 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
24 फ़रवरीरविवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
28 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

4 मुहूर्त
7 मार्चगुरुवारमघापूर्णिमा
9 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
10 मार्चरविवारहस्तद्वितीया
14 मार्चगुरुवारअनुराधाषष्ठी

अप्रैल

2 मुहूर्त
15 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
25 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी

मई

11 मुहूर्त
2 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
3 मईशुक्रवारहस्तद्वादशी
6 मईसोमवारस्वातीपूर्णिमा
8 मईबुधवारअनुराधाद्वितीया
12 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
17 मईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
18 मईशनिवाररेवतीद्वादशी
22 मईबुधवारमृगशिराद्वितीया
27 मईसोमवारमघासप्तमी
30 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
31 मईशुक्रवारहस्तएकादशी

जून

8 मुहूर्त
2 जूनरविवारस्वातीत्रयोदशी
6 जूनगुरुवारमूलप्रतिपदा
8 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
14 जूनशुक्रवाररेवतीदशमी
24 जूनसोमवारमघाषष्ठी
26 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
27 जूनगुरुवारहस्तअष्टमी
29 जूनशनिवारस्वातीदशमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
29 नवंबरशुक्रवाररोहिणीप्रतिपदा
30 नवंबरशनिवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

4 मुहूर्त
4 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
5 दिसंबरगुरुवारमघाअष्टमी
8 दिसंबररविवारहस्तदशमी
14 दिसंबरशनिवारमूलप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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