शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2065

2065 की 48 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
18 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
19 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी
24 जनवरीशनिवारमघाद्वितीया
29 जनवरीगुरुवारस्वातीअष्टमी
31 जनवरीशनिवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
2 फ़रवरीसोमवारमूलद्वादशी
16 फ़रवरीसोमवारमृगशिरादशमी
21 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
23 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
25 फ़रवरीबुधवारस्वातीपंचमी
27 फ़रवरीशुक्रवारअनुराधासप्तमी

मार्च

3 मुहूर्त
8 मार्चरविवारउत्तर भाद्रपदाप्रतिपदा
9 मार्चसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
14 मार्चशनिवाररोहिणीसप्तमी

अप्रैल

5 मुहूर्त
17 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
19 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
23 अप्रैलगुरुवारअनुराधातृतीया
25 अप्रैलशनिवारमूलपंचमी
27 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी

मई

10 मुहूर्त
2 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
3 मईरविवाररेवतीत्रयोदशी
8 मईशुक्रवाररोहिणीतृतीया
16 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
17 मईरविवारहस्तद्वादशी
20 मईबुधवारअनुराधापूर्णिमा
22 मईशुक्रवारमूलतृतीया
24 मईरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
29 मईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
30 मईशनिवाररेवतीएकादशी

जून

6 मुहूर्त
5 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
10 जूनबुधवारमघाषष्ठी
12 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
15 जूनसोमवारस्वातीद्वादशी
19 जूनशुक्रवारमूलप्रतिपदा
26 जूनशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईबुधवाररोहिणीत्रयोदशी
8 जुलाईबुधवारमघापंचमी
10 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
9 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
15 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
16 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
21 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
23 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
26 नवंबरगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
28 नवंबरशनिवारअनुराधाप्रतिपदा

दिसंबर

3 मुहूर्त
7 दिसंबरसोमवाररेवतीदशमी
12 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
13 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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