शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2080

2080 की 40 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
17 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
19 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
27 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
28 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
2 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिराएकादशी
8 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
11 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
16 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
18 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
23 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
28 फ़रवरीबुधवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

3 मुहूर्त
7 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
8 मार्चशुक्रवारहस्ततृतीया
10 मार्चरविवारस्वातीपंचमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
18 अप्रैलगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
24 अप्रैलबुधवारमृगशिरापंचमी
29 अप्रैलसोमवारमघादशमी

मई

12 मुहूर्त
1 मईबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
2 मईगुरुवारहस्तत्रयोदशी
4 मईशनिवारस्वातीपूर्णिमा
6 मईसोमवारअनुराधाद्वितीया
10 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
15 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
16 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
17 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
20 मईसोमवाररोहिणीप्रतिपदा
26 मईरविवारमघाअष्टमी
29 मईबुधवारहस्तएकादशी
31 मईशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

जून

4 मुहूर्त
2 जूनरविवारअनुराधापूर्णिमा
13 जूनगुरुवाररेवतीदशमी
22 जूनशनिवारमघापंचमी
24 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
24 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी
28 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा

दिसंबर

4 मुहूर्त
6 दिसंबरशुक्रवारहस्तदशमी
8 दिसंबररविवारस्वातीद्वादशी
12 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
14 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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