शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2082

2082 की 49 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
17 जनवरीशनिवारमघातृतीया
19 जनवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
24 जनवरीशनिवारअनुराधाएकादशी
26 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
4 फ़रवरीबुधवाररेवतीषष्ठी
8 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
9 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
14 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
18 फ़रवरीबुधवारस्वातीषष्ठी
20 फ़रवरीशुक्रवारअनुराधाअष्टमी
22 फ़रवरीरविवारमूलदशमी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
7 मार्चशनिवाररोहिणीसप्तमी
8 मार्चरविवारमृगशिराअष्टमी
15 मार्चरविवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा

अप्रैल

3 मुहूर्त
18 अप्रैलशनिवारमूलषष्ठी
20 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
25 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

मई

10 मुहूर्त
1 मईशुक्रवाररोहिणीतृतीया
9 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
10 मईरविवारहस्तत्रयोदशी
13 मईबुधवारअनुराधाप्रतिपदा
15 मईशुक्रवारमूलतृतीया
17 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
23 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
24 मईरविवाररेवतीद्वादशी
28 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
29 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

जून

7 मुहूर्त
3 जूनबुधवारमघासप्तमी
6 जूनशनिवारहस्तदशमी
8 जूनसोमवारस्वातीद्वादशी
10 जूनबुधवारअनुराधापूर्णिमा
12 जूनशुक्रवारमूलद्वितीया
20 जूनशनिवाररेवतीदशमी
24 जूनबुधवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

3 मुहूर्त
2 जुलाईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
3 जुलाईशुक्रवारहस्तअष्टमी
5 जुलाईरविवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
2 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
8 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
16 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
21 नवंबरशनिवारअनुराधाद्वितीया
22 नवंबररविवारमूलतृतीया
30 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
5 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
6 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
11 दिसंबरशुक्रवारमघाषष्ठी
13 दिसंबररविवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
16 दिसंबरबुधवारस्वातीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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