शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2085

2085 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
17 जनवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जनवरीगुरुवारहस्तसप्तमी
22 जनवरीसोमवारअनुराधाएकादशी
31 जनवरीबुधवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
4 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
5 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
11 फ़रवरीरविवारमघाद्वितीया
16 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीषष्ठी
18 फ़रवरीरविवारअनुराधाअष्टमी
22 फ़रवरीगुरुवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
26 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

2 मुहूर्त
3 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
12 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा

अप्रैल

3 मुहूर्त
15 अप्रैलरविवारमूलपंचमी
22 अप्रैलरविवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
27 अप्रैलशुक्रवाररोहिणीतृतीया

मई

10 मुहूर्त
4 मईशुक्रवारमघादशमी
6 मईरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
7 मईसोमवारहस्तत्रयोदशी
9 मईबुधवारस्वातीपूर्णिमा
11 मईशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
19 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
20 मईरविवाररेवतीद्वादशी
24 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
25 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
31 मईगुरुवारमघासप्तमी

जून

6 मुहूर्त
3 जूनरविवारहस्तदशमी
9 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा
17 जूनरविवाररेवतीदशमी
27 जूनबुधवारमघापंचमी
29 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
30 जूनशनिवारहस्तअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

6 मुहूर्त
4 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
11 नवंबररविवारमघादशमी
14 नवंबरबुधवारहस्तद्वादशी
18 नवंबररविवारअनुराधाप्रतिपदा
22 नवंबरगुरुवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 नवंबरबुधवाररेवतीद्वादशी

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
2 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
8 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
13 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष