शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2087

2087 की 51 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

8 मुहूर्त
15 जनवरीबुधवाररोहिणीएकादशी
16 जनवरीगुरुवारमृगशिराद्वादशी
23 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
24 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
25 जनवरीशनिवारहस्तषष्ठी
27 जनवरीसोमवारस्वातीअष्टमी
29 जनवरीबुधवारअनुराधादशमी
31 जनवरीशुक्रवारमूलद्वादशी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
8 फ़रवरीशनिवाररेवतीषष्ठी
12 फ़रवरीबुधवाररोहिणीदशमी
13 फ़रवरीगुरुवारमृगशिराएकादशी
20 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
23 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
26 फ़रवरीबुधवारअनुराधाअष्टमी
28 फ़रवरीशुक्रवारमूलदशमी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चरविवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
6 मार्चगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
7 मार्चशुक्रवाररेवतीतृतीया
12 मार्चबुधवारमृगशिराअष्टमी

अप्रैल

6 मुहूर्त
17 अप्रैलगुरुवारहस्तपूर्णिमा
19 अप्रैलशनिवारस्वातीप्रतिपदा
21 अप्रैलसोमवारअनुराधातृतीया
23 अप्रैलबुधवारमूलपंचमी
25 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
30 अप्रैलबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी

मई

7 मुहूर्त
1 मईगुरुवाररेवतीत्रयोदशी
5 मईसोमवाररोहिणीतृतीया
14 मईबुधवारहस्तद्वादशी
18 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
23 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
29 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी

जून

4 मुहूर्त
2 जूनसोमवारमृगशिराद्वितीया
7 जूनशनिवारमघासप्तमी
12 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
19 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

3 मुहूर्त
6 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
7 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
10 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

8 मुहूर्त
8 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
12 नवंबरबुधवाररोहिणीद्वितीया
13 नवंबरगुरुवारमृगशिरातृतीया
20 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
21 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
23 नवंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
28 नवंबरशुक्रवारमूलतृतीया
30 नवंबररविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
5 दिसंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 दिसंबरशनिवाररेवतीएकादशी
10 दिसंबरबुधवारमृगशिराप्रतिपदा
15 दिसंबरसोमवारमघाषष्ठी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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