शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2086

2086 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
20 जनवरीरविवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
21 जनवरीसोमवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
26 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
31 जनवरीगुरुवारमघाद्वितीया

फ़रवरी

6 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवारमघातृतीया
4 फ़रवरीसोमवारहस्तपंचमी
6 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
10 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
21 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीअष्टमी
28 फ़रवरीगुरुवारमघापूर्णिमा

मार्च

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अप्रैल

4 मुहूर्त
18 अप्रैलगुरुवारमृगशिरापंचमी
25 अप्रैलगुरुवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
26 अप्रैलशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
29 अप्रैलसोमवारस्वातीप्रतिपदा

मई

9 मुहूर्त
1 मईबुधवारअनुराधाद्वितीया
5 मईरविवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
10 मईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
11 मईशनिवाररेवतीत्रयोदशी
15 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
23 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
26 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी
30 मईगुरुवारमूलद्वितीया

जून

8 मुहूर्त
7 जूनशुक्रवाररेवतीएकादशी
12 जूनबुधवारमृगशिराप्रतिपदा
17 जूनसोमवारमघाषष्ठी
19 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
22 जूनशनिवारस्वातीएकादशी
23 जूनरविवारस्वातीएकादशी
27 जूनगुरुवारमूलपूर्णिमा
29 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

6 मुहूर्त
3 जुलाईबुधवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
4 जुलाईगुरुवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईसोमवाररोहिणीद्वादशी
14 जुलाईरविवारमघातृतीया
17 जुलाईबुधवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
18 जुलाईगुरुवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
18 नवंबरसोमवाररेवतीद्वादशी
22 नवंबरशुक्रवाररोहिणीद्वितीया
23 नवंबरशनिवारमृगशिरातृतीया
28 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी
30 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
1 दिसंबररविवारहस्तएकादशी
8 दिसंबररविवारमूलद्वितीया
15 दिसंबररविवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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