शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1923

1923 की 39 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
15 जनवरीसोमवारमूलत्रयोदशी
22 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
24 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
28 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
29 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
3 फ़रवरीशनिवारमघाद्वितीया
7 फ़रवरीबुधवारस्वातीसप्तमी
11 फ़रवरीरविवारमूलएकादशी
19 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
24 फ़रवरीशनिवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

4 मुहूर्त
4 मार्चरविवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
5 मार्चसोमवारहस्ततृतीया
7 मार्चबुधवारस्वातीपंचमी
9 मार्चशुक्रवारअनुराधासप्तमी

अप्रैल

5 मुहूर्त
14 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
21 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
26 अप्रैलगुरुवारमघादशमी
28 अप्रैलशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
29 अप्रैलरविवारहस्तत्रयोदशी

मई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जून

9 मुहूर्त
1 जूनशुक्रवारमूलतृतीया
3 जूनरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
9 जूनशनिवाररेवतीदशमी
15 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
20 जूनबुधवारमघाषष्ठी
22 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
24 जूनरविवारस्वातीदशमी
28 जूनगुरुवारमूलपूर्णिमा
30 जूनशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया

जुलाई

6 मुहूर्त
5 जुलाईगुरुवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
6 जुलाईशुक्रवाररेवतीअष्टमी
11 जुलाईबुधवाररोहिणीत्रयोदशी
12 जुलाईगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
19 जुलाईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
20 जुलाईशुक्रवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

2 मुहूर्त
24 नवंबरशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
25 नवंबररविवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
1 दिसंबरशनिवारमघाअष्टमी
3 दिसंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
9 दिसंबररविवारमूलद्वितीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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