शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1925

1925 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
16 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
17 जनवरीशनिवारहस्तसप्तमी
22 जनवरीगुरुवारमूलत्रयोदशी
29 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
30 जनवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी

फ़रवरी

5 मुहूर्त
4 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
13 फ़रवरीशुक्रवारहस्तपंचमी
15 फ़रवरीरविवारस्वातीसप्तमी
19 फ़रवरीगुरुवारमूलएकादशी
25 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
2 मार्चसोमवाररोहिणीअष्टमी
11 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
12 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

2 मुहूर्त
16 अप्रैलगुरुवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
26 अप्रैलरविवाररोहिणीतृतीया

मई

10 मुहूर्त
3 मईरविवारमघादशमी
6 मईबुधवारहस्तत्रयोदशी
8 मईशुक्रवारस्वातीपूर्णिमा
10 मईरविवारअनुराधाद्वितीया
13 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
18 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
23 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
24 मईरविवारमृगशिराद्वितीया
25 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
30 मईशनिवारमघासप्तमी

जून

6 मुहूर्त
4 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
8 जूनसोमवारमूलद्वितीया
14 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी
15 जूनसोमवाररेवतीदशमी
26 जूनशुक्रवारमघापंचमी
29 जूनसोमवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी

जुलाई

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
29 अक्टूबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी

नवंबर

6 मुहूर्त
12 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
13 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
21 नवंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
25 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
26 नवंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
30 नवंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
7 दिसंबरसोमवारमघासप्तमी
9 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
12 दिसंबरशनिवारस्वातीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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