शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1924

1924 की 52 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
18 जनवरीशुक्रवाररोहिणीद्वादशी
19 जनवरीशनिवारमृगशिरात्रयोदशी
24 जनवरीगुरुवारमघातृतीया
26 जनवरीशनिवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
27 जनवरीरविवारहस्तषष्ठी
31 जनवरीगुरुवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
2 फ़रवरीशनिवारमूलद्वादशी
10 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
15 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी
21 फ़रवरीगुरुवारमघाप्रतिपदा
22 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
23 फ़रवरीशनिवारहस्ततृतीया
25 फ़रवरीसोमवारस्वातीपंचमी
27 फ़रवरीबुधवारअनुराधासप्तमी
29 फ़रवरीशुक्रवारमूलदशमी

मार्च

5 मुहूर्त
2 मार्चरविवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
7 मार्चशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
8 मार्चशनिवाररेवतीतृतीया
12 मार्चबुधवाररोहिणीषष्ठी
13 मार्चगुरुवाररोहिणीसप्तमी

अप्रैल

3 मुहूर्त
17 अप्रैलगुरुवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
20 अप्रैलरविवारस्वातीप्रतिपदा
24 अप्रैलगुरुवारमूलषष्ठी

मई

9 मुहूर्त
1 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
7 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
15 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
16 मईशुक्रवारहस्तद्वादशी
19 मईसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
21 मईबुधवारमूलतृतीया
23 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
29 मईगुरुवाररेवतीएकादशी

जून

6 मुहूर्त
4 जूनबुधवारमृगशिराद्वितीया
9 जूनसोमवारमघाषष्ठी
11 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
14 जूनशनिवारस्वातीद्वादशी
19 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
30 जूनसोमवाररोहिणीत्रयोदशी

जुलाई

1 मुहूर्त
9 जुलाईबुधवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

9 मुहूर्त
8 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
9 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
13 नवंबरगुरुवाररोहिणीद्वितीया
14 नवंबरशुक्रवारमृगशिरातृतीया
20 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी
22 नवंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 नवंबररविवारहस्तएकादशी
27 नवंबरगुरुवारअनुराधाप्रतिपदा
28 नवंबरशुक्रवारमूलद्वितीया

दिसंबर

4 मुहूर्त
5 दिसंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 दिसंबरशनिवाररेवतीएकादशी
11 दिसंबरगुरुवाररोहिणीपूर्णिमा
12 दिसंबरशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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