शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1926

1926 की 42 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

3 मुहूर्त
20 जनवरीबुधवाररेवतीसप्तमी
24 जनवरीरविवाररोहिणीएकादशी
25 जनवरीसोमवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

मार्च

4 मुहूर्त
1 मार्चसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
4 मार्चगुरुवारस्वातीपंचमी
6 मार्चशनिवारअनुराधासप्तमी
10 मार्चबुधवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

6 मुहूर्त
17 अप्रैलशनिवारमृगशिरापंचमी
22 अप्रैलगुरुवारमघादशमी
23 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
25 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
28 अप्रैलबुधवारस्वातीपूर्णिमा
30 अप्रैलशुक्रवारअनुराधातृतीया

मई

9 मुहूर्त
2 मईरविवारमूलपंचमी
9 मईरविवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
13 मईगुरुवाररोहिणीद्वितीया
14 मईशुक्रवारमृगशिरातृतीया
20 मईगुरुवारमघाअष्टमी
22 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
23 मईरविवारहस्तएकादशी
27 मईगुरुवारअनुराधापूर्णिमा
29 मईशनिवारमूलद्वितीया

जून

8 मुहूर्त
5 जूनशनिवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 जूनरविवाररेवतीएकादशी
11 जूनशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा
16 जूनबुधवारमघाषष्ठी
18 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
19 जूनशनिवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
24 जूनगुरुवारअनुराधात्रयोदशी
26 जूनशनिवारमूलप्रतिपदा

जुलाई

5 मुहूर्त
2 जुलाईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
3 जुलाईशनिवाररेवतीअष्टमी
7 जुलाईबुधवाररोहिणीत्रयोदशी
16 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
17 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
17 नवंबरबुधवाररेवतीत्रयोदशी
21 नवंबररविवाररोहिणीद्वितीया
22 नवंबरसोमवारमृगशिरातृतीया
27 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
29 नवंबरसोमवारउत्तर फाल्गुनीदशमी

दिसंबर

2 मुहूर्त
2 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी
8 दिसंबरबुधवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष