शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1929

1929 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
17 जनवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
18 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
27 जनवरीरविवारमघाद्वितीया
30 जनवरीबुधवारहस्तषष्ठी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीअष्टमी
6 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
14 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
23 फ़रवरीशनिवारमघापूर्णिमा
25 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
28 फ़रवरीगुरुवारस्वातीपंचमी

मार्च

3 मुहूर्त
3 मार्चरविवारअनुराधाअष्टमी
7 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
13 मार्चबुधवाररेवतीद्वितीया

अप्रैल

6 मुहूर्त
14 अप्रैलरविवारमृगशिरापंचमी
19 अप्रैलशुक्रवारमघाएकादशी
21 अप्रैलरविवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
24 अप्रैलबुधवारस्वातीप्रतिपदा
26 अप्रैलशुक्रवारअनुराधाद्वितीया
29 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी

मई

8 मुहूर्त
1 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
6 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
11 मईशनिवाररोहिणीतृतीया
16 मईगुरुवारमघाअष्टमी
18 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
19 मईरविवारहस्तएकादशी
24 मईशुक्रवारअनुराधाप्रतिपदा
26 मईरविवारमूलतृतीया

जून

8 मुहूर्त
3 जूनसोमवाररेवतीदशमी
8 जूनशनिवारमृगशिराप्रतिपदा
13 जूनगुरुवारमघासप्तमी
14 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
16 जूनरविवारहस्तदशमी
22 जूनशनिवारमूलपूर्णिमा
24 जूनसोमवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
30 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
5 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
12 जुलाईशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
13 जुलाईशनिवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

5 मुहूर्त
14 नवंबरगुरुवाररेवतीद्वादशी
18 नवंबरसोमवाररोहिणीद्वितीया
24 नवंबररविवारमघाअष्टमी
27 नवंबरबुधवारहस्तएकादशी
29 नवंबरशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

2 मुहूर्त
11 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
12 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष