शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1932

1932 की 52 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
15 जनवरीशुक्रवाररेवतीसप्तमी
20 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
21 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
25 जनवरीसोमवारमघाद्वितीया
28 जनवरीगुरुवारहस्तपंचमी
30 जनवरीशनिवारस्वातीअष्टमी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
1 फ़रवरीसोमवारअनुराधादशमी
3 फ़रवरीबुधवारमूलद्वादशी
11 फ़रवरीगुरुवाररेवतीपंचमी
12 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
17 फ़रवरीबुधवारमृगशिरादशमी
22 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
24 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
26 फ़रवरीशुक्रवारस्वातीपंचमी
28 फ़रवरीरविवारअनुराधासप्तमी

मार्च

3 मुहूर्त
3 मार्चगुरुवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी
9 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
10 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया

अप्रैल

5 मुहूर्त
17 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
21 अप्रैलगुरुवारस्वातीप्रतिपदा
23 अप्रैलशनिवारअनुराधातृतीया
25 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
27 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

8 मुहूर्त
2 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
8 मईरविवाररोहिणीतृतीया
9 मईसोमवारमृगशिरातृतीया
14 मईशनिवारमघाअष्टमी
16 मईसोमवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
22 मईरविवारमूलतृतीया
29 मईरविवारउत्तर भाद्रपदादशमी
30 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

जून

6 मुहूर्त
5 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
10 जूनशुक्रवारमघाषष्ठी
12 जूनरविवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
15 जूनबुधवारस्वातीएकादशी
19 जूनरविवारमूलप्रतिपदा
26 जूनरविवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईशुक्रवाररोहिणीत्रयोदशी
8 जुलाईशुक्रवारमघापंचमी
10 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

9 मुहूर्त
9 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
10 नवंबरगुरुवाररेवतीत्रयोदशी
16 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
21 नवंबरसोमवारमघाअष्टमी
23 नवंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
24 नवंबरगुरुवारहस्तएकादशी
26 नवंबरशनिवारस्वातीत्रयोदशी
28 नवंबरसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
30 नवंबरबुधवारमूलतृतीया

दिसंबर

3 मुहूर्त
7 दिसंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
8 दिसंबरगुरुवाररेवतीएकादशी
12 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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