शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1933

1933 की 49 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

4 मुहूर्त
18 जनवरीबुधवारहस्तसप्तमी
22 जनवरीरविवारअनुराधाएकादशी
23 जनवरीसोमवारमूलद्वादशी
30 जनवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदापंचमी

फ़रवरी

9 मुहूर्त
5 फ़रवरीरविवाररोहिणीदशमी
6 फ़रवरीसोमवारमृगशिराएकादशी
11 फ़रवरीशनिवारमघाप्रतिपदा
13 फ़रवरीसोमवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
16 फ़रवरीगुरुवारस्वातीषष्ठी
18 फ़रवरीशनिवारअनुराधाअष्टमी
20 फ़रवरीसोमवारमूलएकादशी
22 फ़रवरीबुधवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
27 फ़रवरीसोमवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
4 मार्चशनिवाररोहिणीअष्टमी
12 मार्चरविवारउत्तर फाल्गुनीपूर्णिमा
13 मार्चसोमवारहस्तप्रतिपदा

अप्रैल

4 मुहूर्त
15 अप्रैलशनिवारमूलषष्ठी
17 अप्रैलसोमवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
22 अप्रैलशनिवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
28 अप्रैलशुक्रवाररोहिणीतृतीया

मई

9 मुहूर्त
6 मईशनिवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
7 मईरविवारहस्तद्वादशी
11 मईगुरुवारअनुराधाद्वितीया
14 मईरविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
19 मईशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
20 मईशनिवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
21 मईरविवाररेवतीद्वादशी
25 मईगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
26 मईशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

जून

7 मुहूर्त
1 जूनगुरुवारमघासप्तमी
3 जूनशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
4 जूनरविवारहस्तएकादशी
9 जूनशुक्रवारमूलप्रतिपदा
17 जूनशनिवाररेवतीदशमी
28 जूनबुधवारमघापंचमी
30 जूनशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी

जुलाई

2 मुहूर्त
1 जुलाईशनिवारहस्तअष्टमी
3 जुलाईसोमवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

1 मुहूर्त
30 अक्टूबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी

नवंबर

6 मुहूर्त
5 नवंबररविवाररोहिणीतृतीया
11 नवंबरशनिवारमघाअष्टमी
18 नवंबरशनिवारअनुराधाप्रतिपदा
20 नवंबरसोमवारमूलतृतीया
22 नवंबरबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
27 नवंबरसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी

दिसंबर

4 मुहूर्त
2 दिसंबरशनिवाररोहिणीपूर्णिमा
3 दिसंबररविवारमृगशिराप्रतिपदा
9 दिसंबरशनिवारमघासप्तमी
14 दिसंबरगुरुवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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