शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1934

1934 की 45 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

5 मुहूर्त
20 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदाषष्ठी
21 जनवरीरविवाररेवतीसप्तमी
25 जनवरीगुरुवाररोहिणीदशमी
26 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
27 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

6 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवारमघाद्वितीया
4 फ़रवरीरविवारहस्तपंचमी
10 फ़रवरीशनिवारमूलएकादशी
12 फ़रवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
18 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
23 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी

मार्च

5 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवारमघापूर्णिमा
3 मार्चशनिवारउत्तर फाल्गुनीद्वितीया
4 मार्चरविवारहस्ततृतीया
8 मार्चगुरुवारअनुराधासप्तमी
11 मार्चरविवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

मई

7 मुहूर्त
5 मईशनिवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
10 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
11 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
16 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
24 मईगुरुवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
25 मईशुक्रवारहस्तएकादशी
27 मईरविवारस्वातीत्रयोदशी

जून

8 मुहूर्त
6 जूनबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
7 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
18 जूनसोमवारमघाषष्ठी
20 जूनबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
23 जूनशनिवारस्वातीएकादशी
25 जूनसोमवारअनुराधात्रयोदशी
27 जूनबुधवारमूलपूर्णिमा
29 जूनशुक्रवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

जुलाई

6 मुहूर्त
4 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
8 जुलाईरविवाररोहिणीद्वादशी
9 जुलाईसोमवाररोहिणीत्रयोदशी
15 जुलाईरविवारमघातृतीया
18 जुलाईबुधवारहस्तषष्ठी
19 जुलाईगुरुवारहस्तसप्तमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

4 मुहूर्त
18 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी
22 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
23 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया
29 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी

दिसंबर

4 मुहूर्त
1 दिसंबरशनिवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
2 दिसंबररविवारहस्तएकादशी
8 दिसंबरशनिवारमूलद्वितीया
15 दिसंबरशनिवाररेवतीदशमी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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