जनवरी
5 मुहूर्त| 20 जनवरी | शनिवार | उत्तर भाद्रपदा | षष्ठी |
| 21 जनवरी | रविवार | रेवती | सप्तमी |
| 25 जनवरी | गुरुवार | रोहिणी | दशमी |
| 26 जनवरी | शुक्रवार | रोहिणी | एकादशी |
| 27 जनवरी | शनिवार | मृगशिरा | द्वादशी |
फ़रवरी
6 मुहूर्त| 1 फ़रवरी | गुरुवार | मघा | द्वितीया |
| 4 फ़रवरी | रविवार | हस्त | पंचमी |
| 10 फ़रवरी | शनिवार | मूल | एकादशी |
| 12 फ़रवरी | सोमवार | उत्तर आषाढ़ा | त्रयोदशी |
| 18 फ़रवरी | रविवार | रेवती | पंचमी |
| 23 फ़रवरी | शुक्रवार | मृगशिरा | दशमी |
मार्च
5 मुहूर्त| 1 मार्च | गुरुवार | मघा | पूर्णिमा |
| 3 मार्च | शनिवार | उत्तर फाल्गुनी | द्वितीया |
| 4 मार्च | रविवार | हस्त | तृतीया |
| 8 मार्च | गुरुवार | अनुराधा | सप्तमी |
| 11 मार्च | रविवार | उत्तर आषाढ़ा | एकादशी |
अप्रैल
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
मई
7 मुहूर्त| 5 मई | शनिवार | उत्तर आषाढ़ा | सप्तमी |
| 10 मई | गुरुवार | उत्तर भाद्रपदा | द्वादशी |
| 11 मई | शुक्रवार | रेवती | त्रयोदशी |
| 16 मई | बुधवार | मृगशिरा | तृतीया |
| 24 मई | गुरुवार | उत्तर फाल्गुनी | दशमी |
| 25 मई | शुक्रवार | हस्त | एकादशी |
| 27 मई | रविवार | स्वाती | त्रयोदशी |
जून
8 मुहूर्त| 6 जून | बुधवार | उत्तर भाद्रपदा | दशमी |
| 7 जून | गुरुवार | रेवती | एकादशी |
| 18 जून | सोमवार | मघा | षष्ठी |
| 20 जून | बुधवार | उत्तर फाल्गुनी | अष्टमी |
| 23 जून | शनिवार | स्वाती | एकादशी |
| 25 जून | सोमवार | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 27 जून | बुधवार | मूल | पूर्णिमा |
| 29 जून | शुक्रवार | उत्तर आषाढ़ा | तृतीया |
जुलाई
6 मुहूर्त| 4 जुलाई | बुधवार | रेवती | अष्टमी |
| 8 जुलाई | रविवार | रोहिणी | द्वादशी |
| 9 जुलाई | सोमवार | रोहिणी | त्रयोदशी |
| 15 जुलाई | रविवार | मघा | तृतीया |
| 18 जुलाई | बुधवार | हस्त | षष्ठी |
| 19 जुलाई | गुरुवार | हस्त | सप्तमी |
अगस्त
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
सितंबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
अक्टूबर
कोई मुहूर्त नहींइस मास में विवाह वर्जित है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं
- सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
- तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
- वार मंगलवार न हो।
- दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
- सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।
प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।