शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1931

1931 की 50 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
14 जनवरीबुधवारअनुराधाएकादशी
16 जनवरीशुक्रवारमूलत्रयोदशी
19 जनवरीसोमवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
24 जनवरीशनिवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
25 जनवरीरविवाररेवतीषष्ठी
30 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
31 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी

फ़रवरी

8 मुहूर्त
4 फ़रवरीबुधवारमघाद्वितीया
7 फ़रवरीशनिवारहस्तपंचमी
9 फ़रवरीसोमवारस्वातीसप्तमी
13 फ़रवरीशुक्रवारमूलएकादशी
15 फ़रवरीरविवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
20 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर भाद्रपदातृतीया
22 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
26 फ़रवरीगुरुवाररोहिणीअष्टमी

मार्च

4 मुहूर्त
5 मार्चगुरुवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
6 मार्चशुक्रवारहस्तद्वितीया
8 मार्चरविवारस्वातीपंचमी
14 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ाएकादशी

अप्रैल

3 मुहूर्त
27 अप्रैलसोमवारमघादशमी
29 अप्रैलबुधवारउत्तर फाल्गुनीद्वादशी
30 अप्रैलगुरुवारहस्तत्रयोदशी

मई

12 मुहूर्त
2 मईशनिवारस्वातीपूर्णिमा
4 मईसोमवारअनुराधाद्वितीया
6 मईबुधवारमूलपंचमी
8 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी
13 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
14 मईगुरुवाररेवतीद्वादशी
15 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
20 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
25 मईसोमवारमघाअष्टमी
27 मईबुधवारहस्तदशमी
29 मईशुक्रवारस्वातीत्रयोदशी
31 मईरविवारअनुराधापूर्णिमा

जून

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

जुलाई

7 मुहूर्त
1 जुलाईबुधवारउत्तर आषाढ़ाप्रतिपदा
2 जुलाईगुरुवारउत्तर आषाढ़ाद्वितीया
8 जुलाईबुधवाररेवतीअष्टमी
12 जुलाईरविवाररोहिणीद्वादशी
13 जुलाईसोमवारमृगशिरात्रयोदशी
18 जुलाईशनिवारमघातृतीया
20 जुलाईसोमवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

4 मुहूर्त
21 नवंबरशनिवाररेवतीद्वादशी
22 नवंबररविवाररेवतीद्वादशी
26 नवंबरगुरुवाररोहिणीप्रतिपदा
27 नवंबरशुक्रवारमृगशिराद्वितीया

दिसंबर

5 मुहूर्त
2 दिसंबरबुधवारमघासप्तमी
5 दिसंबरशनिवारहस्तएकादशी
7 दिसंबरसोमवारस्वातीत्रयोदशी
10 दिसंबरगुरुवारमूलप्रतिपदा
12 दिसंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ातृतीया

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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