शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 1935

1935 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

6 मुहूर्त
16 जनवरीबुधवाररोहिणीद्वादशी
17 जनवरीगुरुवारमृगशिरात्रयोदशी
25 जनवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीपंचमी
26 जनवरीशनिवारहस्तषष्ठी
28 जनवरीसोमवारस्वातीअष्टमी
30 जनवरीबुधवारअनुराधादशमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
1 फ़रवरीशुक्रवारमूलद्वादशी
8 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
13 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
18 फ़रवरीसोमवारमघापूर्णिमा
21 फ़रवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
24 फ़रवरीरविवारस्वातीषष्ठी
28 फ़रवरीगुरुवारमूलदशमी

मार्च

4 मुहूर्त
2 मार्चशनिवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
6 मार्चबुधवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
7 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
11 मार्चसोमवाररोहिणीसप्तमी

अप्रैल

4 मुहूर्त
14 अप्रैलरविवारमघाएकादशी
20 अप्रैलशनिवारस्वातीद्वितीया
24 अप्रैलबुधवारमूलषष्ठी
26 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी

मई

6 मुहूर्त
1 मईबुधवाररेवतीत्रयोदशी
5 मईरविवाररोहिणीतृतीया
11 मईशनिवारमघाअष्टमी
15 मईबुधवारहस्तद्वादशी
19 मईरविवारअनुराधाप्रतिपदा
23 मईगुरुवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

जून

6 मुहूर्त
2 जूनरविवारमृगशिराप्रतिपदा
8 जूनशनिवारमघासप्तमी
13 जूनगुरुवारस्वातीद्वादशी
17 जूनसोमवारमूलप्रतिपदा
19 जूनबुधवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
24 जूनसोमवारउत्तर भाद्रपदाअष्टमी

जुलाई

3 मुहूर्त
7 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
8 जुलाईसोमवारहस्तसप्तमी
11 जुलाईगुरुवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

8 मुहूर्त
8 नवंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
13 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
18 नवंबरसोमवारमघाअष्टमी
21 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
22 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
24 नवंबररविवारस्वातीत्रयोदशी
28 नवंबरगुरुवारमूलद्वितीया
30 नवंबरशनिवारउत्तर आषाढ़ापंचमी

दिसंबर

3 मुहूर्त
5 दिसंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदादशमी
6 दिसंबरशुक्रवाररेवतीएकादशी
11 दिसंबरबुधवारमृगशिराप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

अन्य वर्ष